अमित शाह ई-रिक्शा पर बैठ बांग्लादेशी शरणार्थी के घर भोजन करने पहुंचे
कोलकाता
चुनावी राज्य पश्चिम बंगाल में गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को बीजेपी की 5वीं परिवर्तन यात्रा को हरी झंडी दिखाई। यही नहीं इस दौरान उन्होंने कई लोगों से मुलाकात की और बांग्लादेश से आए शरणार्थी परिवार के घर में भोजन भी किया। इस दौरान बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष और पार्टी के महासचिव कैलाश विजयवर्गीय भी उनके साथ थे। दक्षिण 24 परगना जिले के नारायणपुर जिले में वह सुब्रत बिस्वास के घर खाने पर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने पार्टी के कई अन्य सीनियर नेताओं के साथ जमीन पर ही बैठकर भोजन किया। यही नहीं बिस्वास के घर खाने के लिए नारायणपुर गांव वह ई-रिक्शा के जरिए गए। इससे पहले उन्होंने रोड शो में भी हिस्सा लिया। एक रैली को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि हमारी लड़ाई टीएमसी को हटाने के लिए नहीं बल्कि सोनार बांग्ला के लिए है। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई हमारे बूथ कार्यकर्ताओं और तृणमूल कांग्रेस के सिंडिकेट के बीच है। अमित शाह ने इस दौरान महिला कार्ड खेलते हुए कहा कि यदि बीजेपी सरकार आती है तो राज्य में महिलाओं को 33 फीसदी का आरक्षण दिया जाएगा। अमित शाह ने बांग्लादेशी शरणार्थी हिंदू परिवार के घर भोजन करके एक अहम संदेश देने की कोशिश की है।
खासतौर पर सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के लिहाज से संवेदनशील माने जाने वाले राज्य में अमित शाह का यह संदेश काफी असर कर सकता है। रैली को संबोधित करते हुए अमित शाह ने सूबे की सीएम ममता बनर्जी पर सांप्रदायिकता का आरोप भी लगाया। दुर्गा पूजा के मसले पर ममता बनर्जी पर भी उन्होंने तीखा हमला बोला। अमित शाह ने कहा, 'क्या दुर्गा पूजा पश्चिम बंगाल में नहीं होनी चाहिए? क्या इसके लिए कोर्ट की परमिशन लेने की जरूरत है। क्या सरस्वती पूजा नहीं होनी चाहिए? उन्होंने इसे रुकवा दिया था और बीजेपी के दबाव के बाद ही सरस्वती पूजा शुरू की थी। दीदी, बंगाल यह जानता है कि आपने ही स्कूलों में सरस्वती पूजन की परंपरा को रुकवा दिया था।'

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